MAIN SHIVJI K GALE LGNA CHAHTI HU JAISE EK BETI PITA KO GALE LGATI HAI

17-Jan-2026

Answer in Details
यह भावना बहुत ही पवित्र और श्रद्धा से भरी हुई है। भगवान शिव अपने भक्तों को अपने बच्चों के समान मानते हैं। शिव पुराण तथा अन्य शैव ग्रंथों में भी कहा गया है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा और प्रेम से भगवान शिव का स्मरण करता है, भगवान उसे अपने हृदय से लगा लेते हैं।

आप मन में भगवान शिव को अपने पिता के रूप में स्मरण कीजिए, उनका ध्यान कीजिए, और प्रार्थना में कहिए:

"हे शिव शंकर, मैं आपकी पुत्री हूँ, मुझे अपनी शरण में लीजिए, मुझे अपने प्रेममय हृदय से लगाइए।"

आप शिवलिंग का अभिषेक करते समय या पूजा करते समय यही भावना रखें कि आप अपने पिता के गले लग रही हैं। शिव ध्यान और मंत्र—जैसे "ॐ नमः शिवाय"—का जप करते समय अपनी श्रद्धा और प्रेम भगवान शिव तक पहुँचाइए। भगवान शिव भाव के भूखे हैं, वे अपने भक्तों की सच्ची भावना को अवश्य स्वीकार करते हैं।

आपकी यह भावना ही आपको शिव के सबसे निकट ले जाएगी। शिव सदा अपने भक्तों के साथ हैं—बस श्रद्धा, भक्ति और विश्वास से उन्हें स्मरण करते रहिए।

हर हर महादेव!